हैदराबाद . एक विशेष अदालत ने मुंबई धमाकों के अभियुक्त अबू सलेम को 2001 के फ़र्जी पासपोर्ट से जुड़े मामले में सात साल की सज़ा सुनाई है.अबू सलेम और मोनिका बेदी को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था अदालत ने अबू सलेम को इसी मामले में जुर्माना भी भरने को कहा है. जर्माने की रक़म हज़ार रूपए तय की गई है.
अबू सलेम को पुर्तगाल से 2005 में प्रत्यर्पित किया गया था. उनके ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी नाम से पासपोर्ट हासिल करने को लेकर 2009 में हैदराबाद में मुक़दमा दर्ज किया गया था.”अभियोजन पक्ष ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 420, 419, 468, 471 के तहत अपराध सिद्ध किया है. इस मामले में 39 गवाहों की गवाही हुई और 60 दस्तावेज़ पेश किए गए.”ये धाराएं धोखाधड़ी, दूसरे की शख्सियत अपनाने, गलत दस्तावेज़ पेश करने, धोखाधड़ी के इरादे से फर्ज़ी पास्पोर्ट तैयार करने और मुजरिमाना शाज़िश से तालुक्क़ रखती हैं.”पासपोर्ट एक्ट को छोड़कर सभी धाराओं के तहत आरोप साबित हो चुके हैं. अभियोजन पक्ष ने धारा 420 के तहत अधिकतम सज़ा की मांग की थी. पासपोर्ट फ़र्जीवाड़े में जहां दो साल की सज़ा का प्रावधान है वहीं धोखाधड़ी के तहत अधिकतम सात साल की सज़ा का प्रावधान है.”
आरोप था कि अबू सलेम ने अपने, अपनी दोस्त मोनिका बेदी और पत्नी सबीना आज़मी के लिए हैदराबाद के रीजनल पासपोर्ट दफ़्तर से सितंबर 2001 में पासपोर्ट बनवाए थे.
उन्होंने पासपोर्ट में अपना नाम रामिल कमाल मलिक लिखवाया था और अपना फ़ोटो लगवाकर जन्म वर्ष 1970 दर्ज कराया था. पासपोर्स में उन्होंने अपने घर का पता मकान नंबर 17/107, आरटी स्ट्रीट, कुर्नूल, आंध्र प्रदेश लिखवाया था.
मोनिका बेदी को सना मलिक कमाल के नाम से पासपोर्ट मिला था. उनके घर का पता भी कुर्नूल का ही था. इसी तरह सबीना आज़मी को नेहा आसिफ़ जाफ़री के नाम से पासपोर्ट मिला था. उनके घर का पता भी कुर्नूल ही था.
सलेम और बेदी के पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद 2006 में मोनिका बेदी को धोखाधड़ी के आरोप में पांच साल की सज़ा सुनाई गई थी. मोनिका बेदी की सज़ा 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर घटा दी थी कि वे अपनी सज़ा की अवधि पहले ही पूरी कर चुकी हैं.






















