
भोपाल: भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नेता अपनी जीत के दावों के बीच हार की चर्चा तक करने को तैयार नहीं सवाल यही उठ रहा है कि अगर सब जीत जाएंगे तो हारेगा कौन? मतदान सोमवार 25 नवंबर को हो चुका है और नतीजे आठ दिसंबर को आएंगे।
विधानसभा चुनाव मुकाबला भाजपा तथा कांग्रेस के बीच कांटे का रहा है। इस चुनाव में कुछ इलाके जिनमें बुंदेलखंड, विंध्य व ग्वालियर-चंबल ऐसे हैं जहां समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है तो महाकौशल में यही स्थिति गोंडवाना गणतंत्र पार्टी व जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन की रही है।
चुनाव से पहले की तैयारियों में भाजपा संगठन व अन्य मामलों में कांग्रेस से कहीं आगे थी, मगर वक्त के साथ कांग्रेस ने अपनी स्थिति सुधारी और गुटबाजी को खत्म करने का प्रदर्शन किया।
टिकट वितरण को लेकर भी कांग्रेस भाजपा में मारामारी हुई । चुनाव प्रचार में भाजपा और कांगेस ने अपनी भरपूर ताकत झोंकी। दोनों दलों के स्टार प्रचारकों के अलावा बंद कमरे में रणनीति बनाने वाले भी किसी मामले में पीछे नहीं रहे। दोनों ने ही मतदाताओं को लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ा । चुनाव के दौरान एक दूसरे पर प्रहारमें लगे थे तो अब अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बीत 10 वर्षों में भाजपा ने राज्य की तस्वीर बदलने का काम किया। हर वर्ग के लिए योजनाएं बनाई है। वे इस क्रम को आगे बढ़ाना चाहते हैं, वे उम्मीद करते हैं कि जनता का साथ और समर्थन उन्हें मिलेगा।
कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य ने कहा है कि राज्य का किसान, नौजवान, आमआदमी परेशान है और भ्रष्टाचार ने उसका बुराहाल कर रखा है। जनता इस भ्रष्ट सरकार से त्रस्त हो मुक्ति चाहती है। यही कारण है कि राज्य की जनता बदलाव चाहती है। राज्य में बदलाव की लहर है और लोग भाजपा सरकार से परेशान हो चुके हैं। यही कारण है कि कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत होगी ओर सरकार बनेगी। राज्य के पिछले चुनावों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि वर्ष 200& के चुनाव में भाजपा ने 173 विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था। वहीं 2008 के चुनाव में भाजपा को जीत तो मिली मगर सीटें घटकर 143 रह गई। दूसरी ओर कांगेस ने सीटें बढ़ी थी। 2008 में कांग्रेस का आंकड़ा 71 तक पहुंच गया।
2013 के विधानसभा चुनाव पिछले दो चुनाव से अलग है। भाजपा के खिलाफ भी कई इलाकों में असंतोष है वहीं केंद्र सरकार के कामकाज से भी जनता खुश नहीं है। यही कारण है कि दोनों दलों में आशंका और घबराहट तो है, मगर हार मानने को कोई तैयार नहीं है।




















