मुंबई। देश आज मुंबई हमले की पांचवीं बरसी पर नम आंखों से शहीदों और उन बेगुनाह लोगों को याद कर रहा है जो पाकिस्तानी जमीन से आकर भारत की धरती पर आए आतंकवादियों से लोहा लेते शहीदों और पाकियो के हाथों कत्लोगारद के शिकार बने को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। आज 26/11 मुंबई हमले की पांचवीं बरसी है। अभी तक मुंबईकरों को इंसाफ की दरकार है क्योंकि इन आतंकियों के आका पाकिस्तान की जमीन पर रहकर आज भी हिंदुस्तान के खिलाफ जेहाद का ऐलान कर रहे हैं।
कभी न रुकने-थकने वाला शहर मुंबई 26 नवंबर 2008 को थम गया था। मुंबईकरों ने ये सपने में भी नहीं सोचा था कि आतंकवादी इस तरह कहर ढाएंगे। दस पाकिस्तानी आतंकी समुद्री रास्ते से मुंबई में घुसे और अचानक मुंबई के पांच इलाकों में गोली और बम फेंकने शुरू कर दिए। जो जगह चुनी गईं, वो सभी मुंबई की पहचान हैं। यानी ताज होटल, ओबरॉय होटल, लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्टेशन और नरीमन हॉउस।
हमला रुका और पड़ोसी देश पाकिस्तान का आतंकी फरेब सामने आ गया। हालांकि हमले के बाद पकड़े गए इकलौते आतंकी कसाब ने इस पर मुहर लगा दी थी। मगर पाकिस्तान इस जिंदा सबूत को सामने देखकर भी इनकार करता रहा है ताकि कहीं मुंबई हमले में उसकी भूमिका पर मुहर न लग जाए। भले ही हमला करने वाले प्यादों गुनहगारों को उनकी सजा मिल गई हो, लेकिन सीमा पार पाकिस्तान इसे अंजाम देने वाले सरगनो को पनाह दिए हुए हे.























