काठमांडू.संविधान सभा का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न.नेपाल में हुए संविधान सभा के चुनाव की आज मतगणना जारी है जिसमें नेपाली कांग्रेस ने सीपीएन,यूएमएल पर बढ़त हासिल कर ली है । देश में कई वषो’ के राजनीतिक गतिरोध के बाद संविधान सभा नेपाल का नया संविधान तैयार करेगी। यूसीपीएन माओवादी प्रमुख प्रचंड को आखिरकार साउथ नेपाल के सिराहा 5 निर्वाचन क्षेत्र से बहुत कम वोटों से जीत मिली है। प्रचंड को 15,244 वोट मिले। अपने सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार लीला श्रेष्ठ से उन्हें महज 900 वोट अधिक मिले।
माओवादी प्रमुख प्रचंड को इससे पहले काठमांडो 5 निर्वाचन क्षेत्र में पराजय का सामना करना पड़ा था। वहां पर नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार राजन के. सी. को जीत मिली। इस सीट पर उन्हें तीसरे सीट पर संतोष करना पड़ा।
इस परिणाम के साथ ही माओवादी पार्टी को 240 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष चुनावों में 24 सीट हासिल हुयी है। नेपाली कांग्रेस को 87 सीट और सीपीएन-यूएमएल को 79 सीटों पर जीत हासिल हुई है। अन्य पार्टियों को बाकी 15 सीट पर जीत मिली है।
सिर्फ काठमांडू सीट ही नहीं, पूरे देश में भी नेपाल की माओवादी पार्टी शुरुआती गिनती में नेपाली कांग्रेस से चुनाव हारती नजर आ रही है. 240 सीटों के लिए आए परिणामों में से 150 में माओवादी अपने प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ते दिख रहे हैं.
नेपाल के मुख्य चुनाव अधिकारी नील कंठ उप्रेती ने कहा कि वोटों की गिनती बिल्कुल पारदर्शी तरीके से हो रही है और यह जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव जनता के निर्णयों को समझने का एक तरीका है. मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वे जनता की भावनाओं की कद्र करें.इस चुनाव में लाखों नेपालियों ने हिंसा की धमकियों की परवाह किए बगैर वोट दिया. चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 70 प्रतिशत लोगों ने वोटिंग की.
अमेंरिका के पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर इस चुनाव में प्रेक्षक थे. उन्होंने कहा कि ये चुनाव आगे की ओर एक कदम हैं. उन्होंने कहा कि सभी इस बात को मान रहे हैं कि ये चुनाव निष्पक्ष रहे हैं.संविधान सभा का चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न होने पर वहां की जनता को बधाई देते हुए व्हाइट हाउस ने इसे वर्ष 2006 में शुरू हुई शांति प्रक्रिया के तहत उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने कल बताया यह चुनाव न केवल नेपाल के लिए, बल्कि संघर्षों के बाद पुनर्निर्माण के लिए काम कर रहे और संविधान तथा घरेलू उपायों के जरिये विवादों को हल करने के लिए प्रयासरत, दुनिया के लोगों के लिए मील का एक पत्थर है।






















