भोपाल. मध्यप्रदेश में आगामी 25 नवंबर को एक साथ सभी 230 सीटों के लिये होने जा रहे मतदान के लिये आज शाम पांच बजे चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंचकर समाप्त हो गया। मप्र प्रचार के अंतिम दौर में मतदाता को अपने पक्ष में करने हेतू दोनों दलो ने पूरी ताकत झोकी लेकिन मतदाता की चुप्पी से दोनों दलों की शीर्ष नेता से नीचले कार्यकर्ता तक को भारी हेरत में डाल रखा हे उपर से भरपूर दावे करने वाले नेता अन्दर से किसी आशंका से ग्रसित हे क्योकि मतदाता का रुझान अस्पस्ट ही नहीं विस्मयकारी भी हे,ऊंट किस करवट बेदेगा यह निश्चित नहीं हे , मतदाता भी नेताओ की शातिर बाजी देख अनुभव से सीख अब परिपक्वता का परिचय दे रहा हे .
इस चुनावी दौर में बयानबाजी में गिरावट के स्तर पार होकर एक दुसरे के लिए हर प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल हो रहा हे,नरेंद्र मोदी की ओर से सोनिया गांधी को ‘बीमार’ कहेराष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पत्रकारों से बातचीत में भाजपा को ‘रावण’ तो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को ‘कंस’ कहकर संबोधित किया। इससे पहले जेडीयू के एक नेता ने मोदी को ‘आतंकवादी’ कहा था। बिहार की तरह यूपी के नेता भी बयानबाजी में किसी से पीछे नहीं रहना चाहते हैं। उत्तरप्रदेश बसपा ने नरेंद्र मोदी को ‘तेली’ और महान दलित नेता बाबू जगजीवन राम को ‘चां**’ तक कह डाला। राहुल ने बीजेपी को चोर व लूटने वाली पार्टी कहा.
चुनाव प्रचार समाप्त होने के साथ ही अब राजनीतिक दल और उम्मीदवार घर घर जाकर चुनावी सेंध लगाने और रणनीति बनाने में जुट गये हैं।सभी दलो के विज्ञापनों का स्तर भी लगातार नीचे और व्यक्तिगत होता जा रहा हे सभी खुद को शरीफ और दुसरो को लुटेरा बता रहे हे, जनता को सब जानकारी में इजाफा कर रहे हे.येनकेन वोट हथियाना ही मात्र असली एजेंडा होता जा रहा हे, बहुसंख्यक जनता भी भाषा धर्म पंथ, संप्रदाय जाति रिश्तो और वोट बैंक के कथित ठेकेदारो (की-वोटर्स) की इच्छा, की और ही, बिना चाहे भी झुकती जाती हे, क्या इस देश की लोकतंत्र की नियति यही हे? शायद प्रबुद्ध मतदाता सोचविचार कर निर्णय ले रहा हे .























