देहरादून.राज्य सरकार ने रामदेव के पंतजलि योगपीठ ट्रस्ट के खिलाफ जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था कानून के उल्लंघन समेत गलत ढंग से जमीन खरीदने, बेनामी संपत्ति, स्टांप चोरी के 81 मामले दर्ज किए हैं। 52 मामलों में 10 करोड़ से अधिक की स्टांप चोरी का मामला भी दर्ज किया गया है। 27 मामलों में बिना शासन की इजाजत के खरीदी, अतिक्रमित और दूसरे उपयोग में लाई जा रही जमीन को सरकार में निहित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रेस सम्मेलन में इसका खुलासा किया। उन्होंने कहा कि रामदेव के ट्रस्ट पंतजलि योग ट्रस्ट ने राज्य में जितनी भी जमीनें ली हैं, उसकी हरिद्वार जिला प्रशासन के जरिए जांच कराई गई। जिसमें 154 (4)(3)बी/166/167 जेडएएलआर एक्ट (जमींदारी बिनाश एवं भूमि व्यवस्था कानून), 122 जेडएएलआर एक्ट का उल्लंघन कर जमीनें कब्जाने, बेनामी जमीनें खरीदने समेत कई तरह की गड़बड़ी पकड़ी गई।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने हरिद्वार जिले के सांतर शाह और औरंगाबाद के दो गांवों में ग्राम सभा और सरकारी भूमि अवैध ढंग से कब्जाई है। यह जमीन कुल 7.766 एकड़ है। जिला प्रशासन की ओर से इस अवैध कब्जाई जमीन को छुड़वाने के लिए नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रस्ट के पास कई बेनामी संपत्ति मिली है। इसे ट्रस्ट ने जिन व्यक्तियों नामों से खरीदा है उनका कहीं पता नहीं है। इसके अलावा कई बेनामी जमीनें और हैं जिन पर ट्रस्ट का कब्जा है। इसकी जांच की जा रही है। ट्रस्ट ने 387.5 एकड़ जमीन पंतजलि विवि के लिए औरंगाबाद और शिवदासपुर उर्फ तेलीवाला में खरीदी। लेकिन विवि के लिए केवल 30 एकड़ का भी इस्तेमाल नहीं हुआ। इसमें से काफी जमीन पर कृषि कार्य के लिए उपयोग में लाई जा रही है। जिससे कि ट्रस्ट भविष्य में उसका व्यवसायिक उपयोग कर सके।
बहुगुणा ने बताया कि जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि मुस्तफाबाद गांव में पंतजलि फूड एंड हर्बल पार्क के लिए ट्रस्ट ने 84.86 एकड़ जमीन खरीदी। लेकिन फूड एंड हर्बल पार्क की प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई। इस जमीन को सरकार में निहित करने के लिए जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था कानून की धारा 167 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि मुस्तफाबाद गांव में ट्रस्ट ने 141.17 एकड़ जमीन आयुर्वेदिक मेडिसन और रिसर्च के लिए खरीदने की प्रशासन से अनुमति ली थी। पर इस जमीन का उपयोग पंतजलि के सभी उत्पादों की मैन्यूफैक्चिरिंग, प्रोडक्शन, वेयर हाउसिंग और मार्केटिंग आदि के लिए किया जा रहा है। इसमें फ्लूर, आयल, जूस, हनि, शॉपस, टूथपेस्ट्स, शैंपू और अन्य चीजें भी शामिल हैं। यह जमीन भी सरकार में निहित करने की कार्रवाई की जा रही है।






















