सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी। इसके तहत जेल या पुलिस हिरासत में रहने वाला व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकेगा। 10 जुलाई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सितंबर 2013 में सरकार ने कानून में संशोधन कर शीर्ष अदालत के इस फैसले को पलट दिया था। केंद्र ने इसके पीछे तर्क दिया था कि यदि इसे लागू किया तो विरोधी झूठे आरोपों में नेताओं को जेल भिजवाकर उनकी चुनाव लड़ने की योग्यता छीन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधियों को दो साल या इससे ज्यादा सजा होने पर उनकी सदस्यता खत्म करने का भी फैसला सुनाया था।






















