चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-सितंबर अवधि में तीन खुदरा तेल कंपनियों आईओसी, एचपीसीएल तथा बीपीसीएल को डीजल, रसोई गैस (एलपीजी) तथा केरोसिन की बिक्री लागत से कम भाव पर करने से 60,907 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अकेले डीजल पर 28,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
अगली दो तिमाहियों में पेट्रोलियम कंपनियों को 40,000-40,000 करोड़ रुपये के नुकसान के अनुमान के आधार पर पूरे वित्त वर्ष 2013-14 में यह 1,40,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2012-13 में पेट्रोलियम कंपनियों को लागत से कम मूल्य पर ईंधन की बिक्री से 1,61,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।सरकार ने वित्त वर्ष 2013-14 में 65,000 करोड़ रुपये पेट्रोलियम सब्सिडी आवंटित की थी। इसमें से 45,000 करोड़ रुपये पिछले वित्त वर्ष की सब्सिडी जरूरतों को पूरा करने के लिये पहले ही पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को देने के लिये उपयोग किये जा चुके हैं।
इस घाटे की भरपाई सरकार की तरफ से मिलने वाली नकद सब्सिडी के साथ गेल तथा ओएनजीसी जैसी तेल उत्खनन कंपनियों से मिलने वाली मदद के जरिये की जाती है।























