सीबीआइ के गठन को असंवैधानिक ठहराने के गुवहाटी हाई कोर्ट के फैसले से सकते में आई केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देगी। इस बावत सोमवार को याचिका दायर की जाएगी। सरकार फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग करेगी, क्योंकि हाई कोर्ट के फैसले से सीबीआइ का कामकाज प्रभावित हो रहा है। गुवहाटी हाई कोर्ट ने 6 नवंबर को सीबीआइ के गठन का 1963 का केंद्र सरकार का प्रस्ताव रद कर दिया है।
हाई कोर्ट ने सीबीआइ के गठन के इस प्रस्ताव को असंवैधानिक ठहराते हुए कहा है कि कानूनन सीबीआइ को पुलिस फोर्स की तरह जांच करने का अधिकार नहीं है। फैसले से विभिन्न घोटालों की सीबीआइ जांच का भविष्य अधर में लटक गया है।सीबीआई को असंवैधानिक करार दिए जाने संबंधी गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले का असर दिखने लगा है। टूजी स्पेक्ट्रम के आरोपी डी.राजा व 1984 दंगों में घिरे सज्जन कुमार की ओर से शुक्रवार को हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते उनके खिलाफ चल रहे मुकदमे खारिज करने की मांग की गई। पटियाला हाउस स्थित स्पेशल जज ओपी सैनी की अदालत में शुक्रवार को टूजी मामले की सुनवाई हुई। आरोपी डी. राजा व अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सीबीआई को असंवैधानिक करार दिया है। टूजी मामले की जांच भी सीबीआई ने ही की है। ऐसे में उनपर लगे आरोपों का कोई औचित्य नहीं
सरकार ने फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार को कार्मिक राज्यमंत्री वी. नारायणसामी मामले पर विचार-विमर्श के लिए प्रधानमंत्री से मिले। इस बीच सीबीआइ ने भी याचिका दायर करने के लिए कानूनी सलाह लेनी शुरू कर दी है। कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआइ कार्मिक विभाग के तहत आता है और वही सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देगा। नारायणसामी ने भी कहा कि सोमवार को इस बावत याचिका दायर की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट को बताया जाएगा कि सीबीआइ का गठन 1963 के प्रस्ताव पर हुआ था। पिछले 50 साल से यह लागू है और इसे लागू रहने दिया जाए।
सरकार हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक की मांग भी करेगी, क्योंकि सीबीआइ कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है और आदेश से उसका कामकाज प्रभावित होगा। हाई कोर्ट में सीबीआइ की ओर से पेश हुए केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने भी कहा कि फैसला गलत है और इसे निरस्त होना चाहिए। सरकार निश्चित तौर पर इसे चुनौती देगी। सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा है कि सीबीआइ हाई कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही है। इसके बाद कार्मिक विभाग को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। उन्होंने फैसले के बाद पैदा हुई स्थिति पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।























