जीवन में सबसे बड़ा धन स्वस्थ काया है, इसलिए इसे धनतेरस कहा जाता है। भगवान के 24वें अवतार को धनंवतरी कहा गया, जो अमृत कलश लेकर समृद्ध से प्रसन्न हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन नवीन वस्तुओं का संग्रह करने से वर्ष भर उनकी खरीदी के योग बनते हैं।
इस दिन लक्षमी-गणोश की मूर्तियां खरीदकर उनका पूजन दीपावली के दिन करना चाहिए। स्वर्ण, चांदी, पीतल, ताबा, घर के उपयोग में आने वाली वस्तुएं, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि सभी प्रकार के गृह कार्य में उपयोग में आने वाली वस्तुएं इस दिन खरीदी जा सकती हैं। इस दिन वस्तुओं को खरीदने से आगे भी संग्रह का योग बनता है और जीवन में समृद्धि बढ़ती है। शास्त्र कहते हैं कि धनतेरस में धनवंतरी का पूजन करने से स्वास्थ्य समृद्धि के योग तो बनते हैं, साथ ही जीवन में कुबेर का प्राकट्य होता है। जीवन में सबसे बड़ा धन निरोगी काया है, इसलिए यह कुबेर वर्षा से कम नहीं है। धनतेरस में खरीदी गई वस्तुओं में यह भी माना जाता है कि कोई टूट-फूट या हानि नहीं होती,





















