लोगों को बांटता है खान-पान, एकजुट करता है संविधान: जस्टिस रंजन गोगोई
भावी सीजेआई रंजन गोगोई ने यो बातें सोमवार को निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में कही. जस्टिस गोगोई बुधवार (3 अक्टूबर) को अपना पदभार संभालेंगे.
रंजन गोगोई एक भारतीय न्यायाधीश तथा वर्तमान भारत का उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश है। वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश थे। रजंन गोगोई 2018 के 3 अक्टूबर को भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के रुप में शपथ लेंगें।
पालक: केशब चंद्र गोगोई
भारत के प्रधान न्यायाधीश (नामित) रंजन गोगोई ने भारतीय संविधान को सर्वोपरि बताया है. जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जिसमें हमें क्या खाना चाहिए, पहनना चाहिए, हमारी निजी जिंदगी की छोटी बातें नहीं रह गई हैं. ये ऐसे मुद्दे हैं जो हमें बांटते हैं, लेकिन संविधान हमें एकजुट रखता है.’फेयरवेल स्पीच में बोले CJI- लोगों का इतिहास नहीं, काम देखकर लेता हूं फैसलेभावी सीजेआई रंजन गोगोई ने ये बातें सोमवार को निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में कही. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से ये समारोह आयोजित किया गया. जस्टिस गोगोई बुधवार (3 अक्टूबर) को अपना पदभार संभालेंगे.जस्टिस रंजन गोगोई ने विदाई समारोह में निवर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के काम की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘जस्टिस दीपक मिश्रा उत्कृष्ठ न्यायाधीश हैं. नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान रहा है.’ जस्टिस गोगोई ने इस संबंध में जस्टिस मिश्रा के हाल के फैसलों का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा कि जस्टिस मिश्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के खिलाफ बोला है.जस्टिस चेलामेश्वर के बाद CJI को सरकार की चिट्ठी, कर्नाटक जज के खिलाफ ठीक से नहीं हुई जांचसंवैधानिक आदर्शों को कायम रखना जरूरी
जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘अगर हम अपने संवैधानिक आदर्शों पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सभी जज संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं और वे हमेशा रहेंगे.
भारतीय न्यायपालिका दुनिया की सबसे मजबूत संस्था है। ये हमले और बुरे वक्त में भी मजबूती से खड़ी रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां के न्यायाधीश हमेशा कानून को सही परिपेक्ष्य में पेश करते हैं और न्यायिक परंपरा को कायम रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम है और हमेशा रहेगा। आने वाले नये मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के हाथ में न्यायपालिका की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहेगी।
न्यायपालिका की खूबियों और नामित मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की तारीफ मे ये बातें भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने सोमवार को विदाई समारोह में बोलते हुए कहीं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस मिश्रा के सम्मान में सोमवार को विदाई समारोह रखा था जिसमें जस्टिस गोगोई और जस्टिस मिश्रा ने एक दूसरे की तारीफ की।
जस्टिस मिश्रा 2 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत हो जाएंगे और 3 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेगें।

लोगों को बांटता है खान-पान, एकजुट करता है संविधान: जस्टिस रंजन गोगोई
भावी सीजेआई रंजन गोगोई ने यो बातें सोमवार को निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में कही. जस्टिस गोगोई बुधवार (3 अक्टूबर) को अपना पदभार संभालेंगे.
लोगों को बांटता है खान-पान, एकजुट करता है संविधान: जस्टिस रंजन गोगोई
भारत के प्रधान न्यायाधीश (नामित) रंजन गोगोई ने भारतीय संविधान को सर्वोपरि बताया है. जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जिसमें हमें क्या खाना चाहिए, पहनना चाहिए, हमारी निजी जिंदगी की छोटी बातें नहीं रह गई हैं. ये ऐसे मुद्दे हैं जो हमें बांटते हैं, लेकिन संविधान हमें एकजुट रखता है.’फेयरवेल स्पीच में बोले CJI- लोगों का इतिहास नहीं, काम देखकर लेता हूं फैसलेभावी सीजेआई रंजन गोगोई ने ये बातें सोमवार को निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में कही. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से ये समारोह आयोजित किया गया. जस्टिस गोगोई बुधवार (3 अक्टूबर) को अपना पदभार संभालेंगे.जस्टिस रंजन गोगोई ने विदाई समारोह में निवर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा के काम की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘जस्टिस दीपक मिश्रा उत्कृष्ठ न्यायाधीश हैं. नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान रहा है.’ जस्टिस गोगोई ने इस संबंध में जस्टिस मिश्रा के हाल के फैसलों का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा कि जस्टिस मिश्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के खिलाफ बोला है.जस्टिस चेलामेश्वर के बाद CJI को सरकार की चिट्ठी, कर्नाटक जज के खिलाफ ठीक से नहीं हुई जांचसंवैधानिक आदर्शों को कायम रखना जरूरी
जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘अगर हम अपने संवैधानिक आदर्शों पर सही मायने में कायम करने में विफल रहे, तो हम एक दूसरे को मारते रहेंगे और नफरत करते रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सभी जज संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं और वे हमेशा रहेंगे.
जल्द निपटाने चाहिए पेंडिंग केस
इसके पहले यूथ बार एसोसिएशन के सेमिनार में जस्टिस गोगोई ने लंबे समय से पेंडिग पड़े मामलों को जल्द निपटाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि उनके पास लंबित पड़े मामलों को निपटाने की योजना है और जल्द ही वह इसका खुलासा कर देंगे. जस्टिस गोगोई ने कहा था, ‘लंबित पड़े मामलों से बदनामी होती है. कई बार आरोपी के आपराधिक मामले की सुनवाई उसके सजा पूरे होने के बाद होती है. वहीं, सिविल मामलों में पार्टियों को न्याय दूसरी और तीसरी पीढ़ी पर मिलता है.’CJI के तौर पर आखिरी बार कोर्ट में भावुक हुए दीपक मिश्रा, वकील को गाने से रोकाअसम से ताल्लुक रखते हैं जस्टिस रंजन गोगोई
बता दें कि जस्टिस रंजन गोगोई असम से ताल्लुक रखते हैं. उनका जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ. उन्होंने 1978 में वकालत शुरू की और 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बनाए गए. इसके 9 साल बाद 9 सितंबर 2010 को उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर हुआ.12 फरवरी 2011 को जस्टिस गोगोई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट में आए. सीजेआई बनने के बाद जस्टिस गोगोई का कार्यकाल एक साल, एक महीने और 14 दिन का होगा. वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे
भारत की न्यायपालिका सबसे मजबूत
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता मजबूती के साथ कायम है और इसे किसी तरह की बनावटी चीजें खत्म नहीं कर सकतीं। हमारी न्यायपालिका दुनिया की सबसे मजबूत संस्था है, यहां के न्यायाधीश इतने बड़े मुकदमों के ढेर को निपटाने की क्षमता रखते हैं, वे लगातार समुद्र में बूंद के समान काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास दयावान या निर्दयी हो सकता है। वह किसी को उसके इतिहास से नहीं जांचते बल्कि उसकी गतिविधियों और धारणा के आधार पर जांचते हैं। न्याय, मानवीय संवेदनाओं का होना चाहिए। गरीब और अमीर के आंसू समान होते हैं।
नागरिक स्वतंत्रता के लिए याद किए जाएंगे जस्टिस मिश्रा
जस्टिस गोगोई ने जस्टिस मिश्रा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें नागरिक स्वतंत्रता के फैसलों के लिए याद किया जाएगा। इस संदर्भ मे उन्होंने जस्टिस मिश्रा के कई ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका प्रतिबद्ध होकर काम करती है। कम वेतन के बावजूद यहां निष्ठावान और प्रतिबद्ध न्यायाधीश हैं। हम क्या पहने क्या खाएं ये सब ऐसे मुद्दें है जो हमें आपस में बांटते हैं सिर्फ संवैधानिक नैतिकता है जो हमें बांधे रखती है।
बढ़नी चाहिए न्यायधीशों की सैलरी और रिटायरमेंट की उम्र
इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस मिश्रा निसंदेह निष्ठा और अच्छे चरित्र के व्यक्ति हैं। लोगों को अटकलों के आधार पर न्यायाधीशों पर आक्षेप नहीं लगाने चाहिए। ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने न्यायाधीशों की सेवानिवृति की आयु 65 वर्ष से बढ़ाए जाने की बात की साथ ही कहा कि न्यायाधीशों को जीवन भर पूरा वेतन मिलना चाहिए ताकि वे सेवानिवृति के बाद भी सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वे इस धारणा से सहमत नहीं हैं कि न्यायाधीश को सेवानिवृति के बाद कोई पद नहीं ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतना ज्ञान और अनुभव बेकार नहीं जाना चाहिए। अगर न्यायाधीश सेवानिवृति के बाद पद नहीं लेंगे तो ट्रिब्यूनल को कौन हेड करेगा। वेणुगोपाल ने न्यायाधीशों का वेतन चार – पांच गुना बढ़ाने की बात कही।
विदाई समारोह/ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- मैं लोगों को अतीत के नहीं, कर्म के आधार पर परखता हूं
CJI Dipak Misra Last Day Today Handover responsibility to Ranjan Gogoi
जस्टिस मिश्रा ने 28 अगस्त 2017 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का कार्यभार संभाला था
इससे पहले वे पटना हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल का अंतिम दिन था। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उनका विदाई कार्यक्रम रखा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- मैं कभी भी लोगों को इतिहास के आधार पर नहीं परखता। मैं हमेशा लोगों को उनके कर्म और नजरिए के आधार पर परखता हूं। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था दुनिया में सबसे मजबूत है। इस मौके पर चीफ जस्टिस डेजिग्नेटेड रंजन गोगोई भी मौजूद थे।
युवा वकील हमारी पूंजी- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा
चीफ जस्टिस मिश्रा ने कहा- मैं युवाओं के प्रतिक्रियाशील ज्ञान की प्रशंसा करता हूं, मैं इसका हिस्सा रहा हूं। आज युवा वकील हमारी पूंजी हैं। उनके अंदर न्यायशास्त्र के नए आयामों को विकसित करने की क्षमता है।
उन्होंने बार एसोसिएशन की भूमिका पर भी चर्चा की और कहा- जब भी बार एसोसिएशन किसी न्यायाधीश को जमीनी वास्तविकता से जोड़ता है, तो यह बेहद मजबूत पुल होता है।
उन्होंने कहा- मैं यह नहीं कह रहा हूं कि न्यायाधीश वास्तविकता से परिचित नहीं होते हैं, लेकिन मैं उस पुल की बात कर रहा हूं, जिसकी जरूरत जोड़ने के लिए होती है। ये हमेें जोड़ता है और इसकी अहमियत है।
चीफ जस्टिस डेजिग्नेटेड रंजन गोगोई ने कहा- उन्होंने (चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा) हमेशा व्यक्ति की चुनने और इच्छा जाहिर करने की स्वतंत्रता को कायम रखा है। शक्ति वाहिनी, शफीन जहां और नवतेज जौहर जैसे केसों में चुनने की आजादी जुड़ी हुई थी, जिसे समाज स्वीकृति नहीं देता था।
वकील ने गाना गाया तो चीफ जस्टिस ने उसे रोक दिया
कार्यकाल के अंतिम दिन वे भावुक नजर आए। एक वकील ने उनकी विदाई के लिए गाना गया- तुम जियो हजारों साल। इसी दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने कहा- अभी मैं दिल से प्रतिक्रिया दे रहा हूं,लेकिन शाम के वक्त दिमाग से बोलूंगा।
2011 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने
जस्टिस दीपक मिश्रा 1996 में उड़ीसा हाईकोर्ट के एडिशनल जज नियुक्त किए गए। इसके बाद उनका ट्रांसफर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुआ। वे 1997 में स्थायी तौर पर जज नियुक्त किए गए।
जस्टिस मिश्रा ने 2009 में पटना हाईकोर्ट और 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पद संभाला। सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर उनकी नियुक्ति 2011 में हुई और 28 अगस्त 2017 को उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का कार्यभार संभाला।
न्याय का मानवीय चेहरा होना चाहिए- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- हमारी न्याय व्यवस्था दुनिया में सबसे ज्यादा मजबूत है और इसमें अप्रत्याशित तौर पर केसों को निपटाने की क्षमता है। न्याय का एक मानवीय चेहरा होना चाहिए।
निष्पक्ष, तार्किक, सख्त और ईमानदार होने के कारण न्यायिक व्यवस्था के मुखिया के तौर पर 13 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के बावजूद जस्टिस गोगोई कई अहम बदलाव ला सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के नये चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की देश के प्रति जवाबदेही सर्वोपरि है, इसका अंदाज जनवरी 2018 की ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस से ही स्पष्ट है. निष्पक्ष, तार्किक, सख्त और ईमानदार होने के कारण न्यायिक व्यवस्था के मुखिया के तौर पर 13 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के बावजूद जस्टिस गोगोई कई अहम बदलाव ला सकते हैं-
संपत्ति के सार्वजनिक ब्यौरे से पारदर्शिता और ईमानदारी
जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन 11 जजों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा कोर्ट के वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है. जस्टिस रंजन गोगोई ने शेयर या म्युचुअल फंड में निवेश नहीं किया, इसलिए कंपनियों के मामलों की सुनवाई में उनसे निष्पक्षता की उम्मीद की जा सकती है. जस्टिस गोगोई की तर्ज पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बकाया 14 जज भी अपनी संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करके, पारदर्शिता की नई मिसाल यदि पेश कर सकें तो न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता है.
लंबित मामलों की सबसे बड़ी चुनौती
न्यायिक मामलों में विलंब की वजह से फौजदारी मामलों के ट्रायल के दौरान अधिकांश लोगों की उम्र ही खत्म हो जाती है और दीवानी मामलों में कई पीढ़ियों बाद फैसला आता है. देश की सभी अदालतों में 2.78 करोड़ मामले लंबित हैं, जिनमें 32.4 लाख मामले हाई कोर्ट में लंबित हैं. जस्टिस गोगोई ने अदालतों में लंबित मामलों को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए, समाधान के लिए एक्शन प्लान पर अमल करने की बात कही है.
गरीबों के लिए न्यायिक सहायता
जस्टिस गोगोई नालसा के कार्यवाहक चेयरमैन हैं, जिसके तहत गरीब और कमजोर वर्गों को न्यायिक मदद मिलती है. नालसा के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में 61,593 वकील रजिस्टर्ड हैं. जस्टिस गोगोई के 8 महीने के कार्यकाल में नालसा के 927 कैंप लग चुके हैं. नालसा के तहत 43 लाख मामलों को निपटाये जाने से, अदालतों की मुकदमेबाजी कम हुई है. चीफ जस्टिस बनने पर जस्टिस गोगोई संरक्षक बनकर, नालसा की गतिविधियों का और अधिक विस्तार कर सकते है
सख्ती के बावजूद न्यायिक सक्रियता के पक्षधर नहीं
सरकार, संसद और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार और जिम्मेदारियां संविधान के अनुसार निर्धारित हैं. जस्टिस गोगोई सख्त और अनुशासनप्रिय होने के कारण न्यायिक दायरे के भीतर काम करने में यकीन करते हैं. यदि उन्होंने आदेश पारित कर दिया तो सरकार को उन पर बगैर टाल-मटोल के अमल करना ही पड़ेगा. दूसरी तरफ सरकारी नीतियों में दखलंदाजी के लिए फाइल की गई बेवजह की जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की बाढ़ पर जस्टिस गोगोई के कार्यकाल में लगाम लग सकती है.
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सीनियर एडवोकेट्स का तिलस्म टूटने से मेरिट बढ़ेगी
जजों को कोलेजियम द्वारा नियुक्त किया जाता है जबकि सीनियर एडवोकेट्स को सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच द्वारा नियुक्त किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनेक मामलों में महंगी फीस, बदजुबानी और बेवजह हस्तक्षेप के लिए कई सीनियर एडवोकेट्स की भर्त्सना की गई. पीआईएल और बड़ी कंपनियों के मामलों में सीनियर एडवोकेट्स द्वारा पैरवी से आम जनता के मामले दरकिनार हो जाते हैं.
सुधारों के तहत सीनियर एडवोकेट्स द्वारा मामलो की मेंशनिंग पहले ही बन्द हो गई है. जस्टिस गोगोई के चीफ जस्टिस बनने पर मामलों की मेरिट पर सुनवाई होने से, योग्य वकीलों को बढ़ावा मिलेगा. वीआईपी सुनवाई पर लगाम लगने के साथ पुराने लंबित मामलों पर जस्टिस गोगोई के कार्यकाल में जल्द फैसलों की आमद आने पर न्यायिक सुधारों की क्रांति का नया दौर शुरू हो सकता है, जिसकी देश को सख्त जरूरत है.























