उज्जैन मध्य प्रदेश में आयोजित होने वाले महाकुम्भ सिहंस्थ 2016 की तैयारियां जोरों पर है। गृहस्थ संत आचार्य पं. देवप्रभाकर शास्त्री (दद्दाजी) जिन्हें शिष्य भगवान् श्री कृष्ण का साक्षात् अवतार मानते हे, ने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थित पड़ाव स्थल का भूमिपूजन किया। इस मौके पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्रगिरीजी महाराज ,महावीर प्रसाद वशिष्ठ, आलोक वशिष्ठ, कई साधू संत भक्त, सेकड़ो शिष्य गण तथा कलाकार आशुतोष राणा भी उपस्थित थे।
दद्दाजी द्वारा पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिंगों के निर्माण का यह 108वां आयोजन होगा। सिहंस्थ के दौरान यहां सवा 5 करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा। इस दौरान 108 पुराणों का पारायण तथा सप्तदिवसीय श्रीमद् भगवत कथा का आयोजन भी किया जाएगा। सबसे ज्यादा पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए दद्दाजी का नाम गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है।
7 दिनों में बनेंगे सवा 5 करोड़ शिवलिंग
पत्रकारों से चर्चा करते हुए दद्दाजी ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग बनाने का आयोजन वरुथिनी एकादशी (3 मई, मंगलवार) से अक्षय तृतीया (9 मई, सोमवार) तक किया जाएगा। इस दौरान भक्त रोज करीब 75 लाख शिवलिंगों का निर्माण करेंगे। अब तक विभिन्न आयोजन में दद्दाजी के शिष्य लगभग 400 करोड़ शिवलिंगों का निर्माण कर चुके हैं।
श्रीराम ने की थी शुरुआत
श्रीमहंत नरेंद्र गिरिजी ने बताया पार्थिव शिवलिंग पूजन की शुरुआत भगवान श्रीराम ने श्री रामेश्वरम् से की थी। भगवान ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजन किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। यह शास्त्रोक्त पूजा पद्धति है, जिससे पुन्य लाभ होता हे और मानव मात्र का कल्याण निश्चित हे।
108वें आयोजन के साथ पूर्ण होगा संकल्प
दद्दाजी ने बताया कि उनके गुरु करपात्रीजी महाराज के कहने पर उन्होंने 108 पार्थिव शिवलिंग निर्माण महायज्ञ करने का संकल्प लिया था। इसकी शुरूआत 1980 में जबलपुर से हुई। 100वां आयोजन 2004 में भोपाल में हुआ और सिंहस्थ 2016 में 108वां आयोजन होगा। इस आयोजन के साथ ही दद्दाजी का संकल्प भी पूरा होगा।
गंगा में डुबकी लगाएंगे तभी शीतलता मिलेगी
दद्दाजी का कहना है- धूप में तपते हम जब गंगा में डुबकी लगाएंगे तभी शीतलता का अहसास होगा। युवाओं को हम अपनी संस्कृति से परिचित करा रहे हैं। हमने युवाओं को धर्म-संस्कृति से जोड़ा है। हमारे अनुष्ठान में 75 प्रतिशत युवा भाग लेते हैं। हम युवाओं का ध्यान पश्चिमी संस्कृति से हटा कर हमारी संस्कृति की ओर दिला रहे हैं। उन्हें अंधेरे से उजाले का रास्ता दिखा रहे हैं। हमारा यह मिशन सफल है।
नारी सम्मान, भ्रूण हत्या पर रोक
दद्दाजी ने कहा कि माघ मेले में हुए संत सम्मेलन में नारी सम्मान पर भी चर्चा हुई। भ्रूण हत्या पर रोक लगाने का संदेश महात्माओं ने दिया है। हम भी अपने कार्यक्रमों में नारी सम्मान और भ्रूण हत्या पर रोक लगाने के लिए प्रेरित करेंगे।
काली मिट्टी से ही शिवलिंग निर्माण क्यों
दद्दाजी द्वारा आयोजित पार्थिव शिवलिंग निर्माण कार्यक्रम में काली मिट्टी से ही शिवलिंगों का निर्माण किया जाता है। इस संबंध में उन्होंने बताया कि काली मिट्टी में औषधीय गुण होते हैं, यह खेती के लिहाज से भी उत्तम होती है। इस मिट्टी से बने शिवलिंगों को प्रवाहित करने पर जल प्रदूषित नहीं होता।
जल प्रदूषण को कम करने की अनूठी पहल
दद्दाजी ने बताया कि विभिन्न कार्यक्रमों में उनके शिष्य व भक्त फूलमालाओं से उनका स्वागत करते हैं। बाद में ये फूलमालाएं नदी आदि में प्रवाहित कर दी जाती हैं। इससे भी जल प्रदूषण होता है। इस प्रदूषण को रोकने के लिए उन्होंने मात्र एक फूल से स्वागत करने की सीख अपने शिष्यों को दी है और स्वयं भी इस अनूठी पहल के साथ जल प्रदूषण को कम करने का संकल्प लिया है।























