मंथन. नई दिल्ली. पूर्व से ही अपेक्षा अनुसार कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पद छोड़ने की पेशकश को ठुकरा दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित सभी सदस्यों की राय थी कि त्यागपत्र समस्या का हल नहीं है।
करीब ढाई घंटे चली सीडब्लूसी की बैठक के नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि वह समझती है कि अध्यक्ष होने के नाते वह जरूरी परिवर्तन नहीं कर पाई। इसलिए हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपना पद छोड़ने की पहल करती हैं। इसके बाद सभी सदस्यों ने एक समवेत सस्वर में उनकी पेशकश अपेक्षानुसार नामंजूर कर दी।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार के स्तर पर जो भी कमियां रही है, उसकी जिम्मेदारी वह स्वीकार करते हैं।
संगठन में जवाबदेही की वकालत करते रहे राहुल गांधी ने खुद से जवाबदेदी की शुरुआत करने की पेशकश की। सूत्रों के मुताबिक, सीडब्लूसी की बैठक हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी, पर बैठक में ज्यादातर समय देश भर में अभूतपूर्व 44 सीटे प्राप्त करने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व की तारीफ होती रही। पार्टी के वरिष्ठ नेता आरके धवन को हस्तक्षेप कर यह कहना पड़ा कि हम कब तक इस विषय पर चर्चा करेंगे।
पार्टी महासचिव जनार्दन दिवेदी के मुताबिक, सीडब्लूसी ने एक मत से इस पर चर्चा करने से मना कर दिया। सदस्यों की राय थी कि इस्तीफा समस्या का हल नहीं है। जरुरत इसकी है कि पार्टी किस तरह आगे बढ़े। कई सदस्यों ने जिला स्तर से लेकर राज्य सरकारों तक परिवर्तन की बात की।
सीडब्लूसी के एक सदस्य के मुताबिक, पी.चिदंबरम ने बैठक में टिकट बंटवारे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में दो उम्मीदवार पार्टी छोड़ गए। गौतमबुद्ध नगर सहित कई दूसरी सीट पर भी प्रत्याशियों ने पार्टी का हाथ छोड़ दिया। बैठक में चुनाव में प्रचार कमजाेर होने का भी मुद्दा उठा। पर बैठक में ज्यादातर वक्त कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के इस्तीफे की पेशकश पर चर्चा हुई।कांग्रेस कार्यसमिति ने एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी में सभी स्तर पर संगठन में बदलाव की जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दी है।
बैठक में सीडब्लूसी के 41 सदस्यों में 38 सदस्य मौजूद थे। इनमें से चार सदस्यों के अलावा सभी ने अपनी बात रखी। बैठक में कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने प्रस्ताव पेश किया। सभी सदस्यों ने इसका समर्थन किया।
हार के बड़े कारण
कांग्रेस ने शर्मनाक हार के लिए सांप्रदायिक धुव्रीकरण, विरोधी मीडिया दुष्प्रचार, विपक्ष के असीमित संसाधनों के इस्तेमाल और सरकार की दस साल की सरकार विरोधी एंटी एन्कम्बंसी माहौल को जिम्मेदार ठहराया है।
कांग्रेस का कहना है कि मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों के साथ विरोधियों का अक्रामक प्रचार और सरकार विरोधी लहर चुनाव में हार की एक अहम वजह बनी।
अब क्या करेंगे
कांग्रेस में जल्द बड़े पैमाने पर बदलाव होने की संभावना है। पुनर्गठन में पार्टी नेताओं की जवाबदेही तय करते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी संगठन में नए लोगों को मौका दे सकती हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हार पर विस्तृत चर्चा के लिए जल्द चिंतन शिविर या एआईसीसी का अधिवेशन बुला सकती है। बदलाव के बारे में सुझाव के लिए किसी समिति का भी गठन किया जा सकता है।
सदस्यों की राय
सदस्यों की राय थी कि आरएसएस देश के लिए एक बड़ा खतरा है। ऐसे में कांग्रेस कमजाेर होती है तो यह बहुत खतरनाक होगा। कई सदस्यों ने हार से सबक सी्रखते हुए पांच राज्यों में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव को चुनौती के तौर पर लेने की वकालत की। उनकी दलील थी कि मनोबल नहीं टूटना चाहिए।
गाँधी परिवार पर निर्भर और जनता से कटी कांग्रेस
कांग्रेस में संगठन या नेतृत्व दोनों ही नहीं हे, सारे कांग्रेसी क्षत्रप गांधी परिवार के संरक्षण में निश्चिन्तित्ता और चमत्कार का अनुभब करते हुए जनता के मुद्दो से दूरी बनाये रहते हे जेसे रामसेतू पर बहुसंख्यक विरोधी कार्य, योजना आयोग की अप्रासंगिक गरीबी रेखा की, विशेषतः भोजन की दरो में कुतर्क करते कांग्रेसी, खुद भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी पूरी केबिनेट लेकिन गरीबो को गैस की टंकी की कतोत्री, कार्पोरेट को अरबो खरबों की बेंको को, प्राकृतिक संसाधन सम्पति को लूटने छूट देते रहे,वाड्रा ने तीन साल में तीन सो करोड़ किस जादू से कमाए लेकिन बेरोजगारी से युवा ट्रस्ट रहा , फसले बर्बाद होने से किसानो ने आत्महत्या की,लेकिन सरकार किंगफिशर की कंपनियो में पैसा डूबाती रही ,आईपीएल जेसे आयोजनो ने देश को और चिडाया,रूपया नीचे गिरा विदेशी निवेश को फायदा पहुच्या गया , लेकिन जनता को बताया की पेसे पेड़ पर नहीं लगते, देश के सेंटीमेंट्स के विरूद्ध लगातार पाकिस्तान की तरफदारी करने वाले को विदेश मंत्री बनाया, देशवासियो को अपमानित कर फोज और उसके अधिकारियों की लगातार उपेक्षा की , सामान रैंक पेंशन वेतन आयोग के निर्णय लेने में कोताही बरत देशवासियो को आक्रोशित करना, निर्भया , लोकपाल , संसद का अपराधीकरण पर समय रहते कोई ठोस काम नहीं, आरटीआई कमजोर करने की नोकरशाही की कोशिसो आदि मुद्दो पर कांग्रेस का देश को और आम जनता को हमेशा ही चिड़ाने वाला स्टैंड रहा है । मजबूरी में जो कुछ भूमि सुधार, भोजन के कानून सरकार ने जाते जाते बनाये जिनका क्रियांबन भी ये नहीं कर सके, उस पर भी क्रेडिट लेने के प्रयास से खुद को ठगा सा महसूस करती जनता अब मूर्ख बनाने की कोशिशो से उबलपडी , देश के महत्पूर्ण मुद्दों पर कथित कांग्रेस नेतृत्व सोनिया राहूल ने तो आपराधिक चुप्पी धारण कर कांग्रेस को रसातल में पहुचने का कृत्य किया, गरीबो के हित की मनमोहन योजनाओ जो की धरातल पर क्रियान्वित ही नहीं होती हे, के और देश में अप्रासंगिक हो गए गांधी परिवार, के भरोसे हो गया आजादी की योद्धा कांग्रेस का वजूद, शर्मिंदगी का सबब हे ये।






















