मंथन. नईदिल्ली.उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग देश के अगले सेना प्रमुख होंगे. मंत्रिमंडल ने मंगलवार को उनकी नियुक्त को मंजूरी दे दी. यूपीए गठबंधन सरकार की कामकाज निपटाने से संबंधित मंत्रिमंडल की आखिरी बैठक में मंगलवार को इस फैसले पर मुहर लगाई गई.
उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग अगले सेना प्रमुख होंगे, जो की वरिष्ठतम सेना अधिकारी हे वे जनरल बिक्रम सिंह की जगह लेंगे। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने रक्षा मंत्रालय की सिफारिश प्राप्त होने के एक दिन बाद आज उसे मंजूरी प्रदान कर दी।
59 वर्षीय लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग फिलहाल वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ हैं और लेफ्टिनेंट जनरलों में सबसे वरिष्ठ हैं। बल के प्रमुख के तौर पर उनका कार्यकाल 30 महीने का होगा। वह जनरल सिंह की जगह लेंगे, जो 31 जुलाई को सेवानिवृत हो रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल के छात्र रहे सुहाग 1970 में एनडीए में शामिल हुए थे और जून 1974 में उन्हें 4:5 जीआर (एफएफ) कमीशन प्राप्त हुआ था। जनरल ऑफिसर भारत और विदेशों में विभिन्न करियर पाठ्यक्रमों में शरीक हुए, जिनमें सीडीएम सिकंदराबाद में 1997-98 में एलडीएमसी, 2006 में नयी दिल्ली में एनडीसी पाठयक्रम, 2005 में अमेरिका में एग्जक्यूटिव पाठयक्रम और 2007 में केन्या में सीनियर मिशन लीडर्स पाठ्यक्रम (संयुक्त राष्ट्र) शामिल हैं।
श्रीलंका में ऑपरेशन पवन में वह कंपनी कमांडर थे और कश्मीर घाटी में उन्होंने जुलाई 2003 से लेकर मार्च 2005 के बीच आतंकवाद रोधी अभियानों के खिलाफ 53 वीं इंफैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली थी। उन्हें अक्टूबर 2007 से लेकर दिसंबर 2008 के बीच कारगिल में 8 माउंटेन डिवीजन की कमांडिंग का श्रेय प्राप्त है।
2012 में जनरल बिक्रम सिंह को तीन महीने पहले ही नियुक्ति किया गया.
उप थल सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के थल सेना प्रमुख नियुक्त हो जाने के बाद इस मामले में विवाद खत्म हो जाना चाहिए। हमें यह उम्मीद करनी चाहिए कि अगली केंद्र सरकार जिसकी भी हो, वह थल सेनाध्यक्ष के पद को विवाद में नहीं घसीटेगी। मनमोहन सिंह सरकार थल सेनाध्यक्ष की नियुक्ति पहले ही करना चाहती थी, लेकिन इस बात को लेकर विवाद किया गया कि क्या एक जाती हुई सरकार को नियुक्ति करनी चाहिए या यह काम अगली सरकार पर छोड़ देना चाहिए। रक्षा मंत्रालय ने यह मामला चुनाव आयोग की मंजूरी के लिए भेज दिया था। चुनाव आयोग ने रक्षा मंत्रालय के नियुक्ति के अधिकार को स्वीकृत किया। चुनाव आयोग का कहना है कि रक्षा मामलों से जुडे़ फैसले करने में आचार संहिता आड़े नहीं आती। इसके बाद जनरल सुहाग की नियुक्ति की राह खुल गई। थल सेनाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सिर्फ आचार संहिता का विवाद नहीं था, इसमें कुछ अन्य विवाद और कानूनी मसले भी खड़े किए गए थे, लेकिन सरकार ने वरिष्ठता के पारंपरिक प्रतिमान को मानते हुए लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग को थल सेनाध्यक्ष बनाने का फैसला किया। वरिष्ठता को सामान्यत: थल सेनाध्यक्ष बनाने के लिए योग्यता माना जाता है और जनरल सुहाग फिलहाल उप थल सेनाध्यक्ष हैं, इसलिए इस बात पर विवाद नहीं होना था।























