
मंथन. नई दिल्ली: एग्जिट पोल्स के मुताबिक देश में जहां बीजेपी की लहर है तो वहीं कांग्रेस के खिलाफ एंटी इंकम्बैंसी फैक्टर काम कर रहा है. लेकिन कम से कम पांच ऐसे बड़े राज्य हैं जहां न तो बीजेपी और ना ही कांग्रेस कोई फैक्टर है, बल्की वहां ये पार्टियां लड़ाई में ही नहीं हैं.
सर्वे के मुताबिक के 165 सीटें गैर-एनडीए और गैर यूपीए दलों की झोली में जा सकती हैं. एनडीए को 281 तो यूपीए को 97 सीटें मिल सकती हैं. अगर एग्जिट पोल नतीजे में बदल गए तो एनडीए आसानी के साथ सरकार बना लेगा, लेकिन अगर एनडीए का आंकड़ा 272 के जादुई आंकड़ा से कम आया तो ऐसे में ये कुछ दल किंगमैकर की स्थिति में होंगे.
1. पश्चिम बंगाल: ममता की लहर
एग्जिट पोल्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और बीजेपी की स्थिति बहुत ही खराब है, लेफ्ट भी कमज़ोर दिख रहा है. यहां दीदी की तूती बोलती दिख रही है और टीएमसी को 24 सीटें मिलने का अनुमान है. लेफ्ट को 12 सीटें मिल सकती हैं. बीजेपी को एक तो कांग्रेस को पांच सीटें मिल सकती हैं.
2. तमिलनाडु: जयललिता की जय जयकार
एग्जिट पोल्स के मुताबिक तमिलनाडु में एआईडीएमके और डीएमके में सीधी लड़ाई रही है. बीजेपी गठबंधन कर यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है. बीजेपी गठबंधन 4 सीटें जीत सकती है. कांग्रेस एक सीट जीत सकती है. डीएमके को 10, एआईडीएमके 22 सीटें मिल सकती है. तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटें हैं.
3. आंध्र प्रदेश: जगन रेड्डी हैं रेडी
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर में है. पिछले चुनाव में कांग्रेस को यहां से 29 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार वह सिर्फ 3 पर सिमट जाएगी. यहां वाईएसआर रेड्डी के बेटे जगन मोहन रेड्डी का जादू चल रहा है और उनकी पार्टी 18 सीटें जीत सकती है. टीडीपी को 8, कांग्रेस को 3 और टीआरएस को 8 सीटें मिल सकती हैं. आंध्र प्रदेश में लोकसभा की 42 सीटें हैं.
4. ओडिशा: नवीन पटनायक का जादू है बरकरार
एग्जिट पोल्स के मुताबिक ओडिशा में मोदी की लहर दिख रही है और यहां बीजेपी नवीन पटनायक को बड़ी टक्कर दे रही है. पटनायक की पार्टी बीजेडी 9 सीटों पर सिमट जाएगी, जबकि बीजेपी 10 सीटें जीत जाएगी. कांग्रेस को दो सीटें मिल सकती हैं. राज्य में लोकसभा की 21 सीटें हैं.
5. यूपी: मायावती और मुलायम से उम्मीदें
एग्जिट पोल्स के मुताबिक यूपी में बीजेपी जबरदस्त वापसी कर रही है और 46 सीटों तक जीत सकती है. लेकिन यहां बीएसपी 13 और एसपी 12 सीटें जीत सकती हैं, यानी दिल्ली में सत्ता का समीकरण थोड़ा गड़बड़ हुआ तो ये दोनों पार्टियां बड़ी भूमिका में होंगी.






















