
मंथन. लोकसभा चुनाव 2014 में अपने पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की कथित लहर के भरोसे मिशन 272 का लक्ष्य हासिल करने का सपना देख रही बीजेपी की राह इतनी भी आसान नहीं लग रही है। विभिन्न राज्यों के प्रभावी क्षेत्रीय दल, दक्षिण में पार्टी की अनुपस्थिति , बिहार में लालू के कमबैक और दिल्ली हरयाणा पंजाब में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कुछ ऐसे फैक्टर उभरे हैं, जो मोदी की कथित लहर को ख़त्म करने में कामयाब हो गए लगते हे और बीजेपी के इस मिशन को धक्का पहुंचा सकते हैं। ऐसे में बीजेपी चुनावी नतीजों के बाद बनने वाली संभावित परिस्थितियों के मद्देनजर रणनीति बनाने में जुट गई है।
छोटे दलों से जुगाड़
बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह रविवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने पहुंचे थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में इस बात पर चर्चा हुई कि अगर एनडीए को बहुमत का आंकड़ा नहीं मिलता तो किस तरह से सरकार बनाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को डर है कि हो सकता हे कि उसे यूपी बिहार और बंगाल में अपेक्षा के अनुरूप बड़ी जीत न मिल सके। ऐसी दशा में बीजेपी बड़े क्षेत्रीय खिलाडि़यों जैसे एआईएडीएमके, तृणमूल कांग्रेस या बीएसपी बीजू जनता दल, के द्वारा ठुकराए जाने से छोटी पार्टियों मसलन- ओम प्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोक दल, के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना राष्ट्र समिति से जुगाड़ ज़माने की सम्भावनाये टटोल रही हे।




















