
नई दिल्ली.मंथन.चुनाव के आखिर दौर में चले गए जाति कार्ड नीच जाति का पलटवार और आगे चला गया, लग रहा हे कि कांग्रेस और विपक्षी दल मोदी से किसी ऐसे ही फाल्ट की प्रतीक्षा में थे , भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को ‘फर्जी’ ओबीसी करार देने के बाद कांग्रेस एक कदम और बढ़ गई है पार्टी ने कहा कि एक अप्रैल 1978 को जारी अधिसूचना में 82 जातियों को ओबीसी की सूची में शामिल किया गया था। मोध घांची इसमें शामिल नहीं थी। पार्टी ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने मोध घांची को ओबीसी में शामिल किया। ताकि, ओबीसी को मुख्यमंत्री बनाने का सियासी लाभ लिया जा सके ने भी मोध घांची को ओबीसी की केंद्रीय सूची में नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी को गुजरात भेजने से कुछ माह पहले शामिल किया था। पार्टी ने नीची जाति को मुद्दा बनाने के लिए भाजपा से माफी मांगने की भी मांग की।
नरेंद्र मोदी के ओबीसी कार्ड के जबाव में कांग्रेस ने कई ओबीसी नेताओं को पेश किया। वरिष्ठ नेता वायलर रवि और युवा नेता अरुण यादव ने कहा कि किसी जाति को नीची जाति कहना उसका अपमान है। इसलिए, नरेंद्र मोदी को ओबीसी से माफी मांगना चाहिए। कांग्रेस ने एक बार फिर दोहराया कि नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी जाति मोध घांची को ओबीसी में शामिल किया है।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने गुजरात सरकार के इस दावे को गलत करार दिया कि मोध घांची 1994 में ओबीसी में शामिल किया गया था। माकन ने कहा कि एक अप्रैल 1978 को जारी अधिसूचना में 82 जातियों को ओबीसी की सूची में शामिल किया गया था। मोध घांची इसमें शामिल नहीं थी। इसके बाद 1994 में आयोग ने मोध घांची सहित कई जातियों को ओबीसी में जोड़ने की सिफारिश की थी।
अजय माकन ने कहा कि भाजपा के अंदर 1999 में केशुभाई पटेल सरकार को गिराकर किसी पिछड़े वर्ग के नेता को मुख्यमंत्री बनाने की साजिश रची गई। इसके तहत ही बीजेपी की केंद्र सरकार ने मोध घांची को ओबीसी में शामिल किया। ताकि, ओबीसी को मुख्यमंत्री बनाने का सियासी लाभ लिया जा सके। इसके बाद 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने मोध घांची को राज्य में ओबीसी का दर्जा दे दिया।





















