मुंबई. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जब दागी नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत देने वाला बिल फाड़ा था तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी काफी आहत हुई थीं और चाहती थीं कि उनके पिता इस्तीफा दे दें। ऐसा दावा पीएम के पूर्व सलाहकार संजय बारू ने किया है, जबकि मनमोहन की बेटी बारू को झूठा और विश्वासघाती बता चूकी हे.
भाजपा के प्रलोभन पर किताब जारी करने के आरोप पर उन्होंने कहा कि चुनाव के वक्त ही इस विषय की रोचकता हे बाद में मनमोहन इतिहास हो जाते.
बारू ने कहा कि प्रधानमंत्री मानते थे कि 2009 लोकसभा चुनावों में यूपीए की जीत उनकी जीत थी। वह बताते हैं, ‘मैंने प्रधानमंत्री को कभी टांग पर टांग चढ़ाकर बैठे नहीं देखा था। लेकिन उस दिन (2 जून 2009) जब मैं उनसे मिला तो वह अपनी टांगें बांधकर बैठे हुए थे और जीत के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन उन्हें किसी ने उस जीत का श्रेय नहीं दिया। मेरे दोस्त पृथ्वीराज चव्हाण, जिन्हें सिंह ही पीएमओ में लाए थे, उन्होंने भी कहा कि जीत का श्रेय राहुल गांधी को जाता है।’
बारू के मुताबिक उनकी किताब भारतीय राजनीति में एक अनूठे प्रयोग का विश्लेषण है, ‘ऐसा प्रयोग जो पहले पांच साल सफल रहा और उसके बाद के पांच साल में विफल हो गया।’ बारू ने कहा मनमोहन ने विश्व के बड़े नेताओ से अपने संबंधो से देश और अनिवासी भारतीय कोर्पोरेट को भी बहूत मदद की , जेसे कि 2007 में जब लक्ष्मी मित्तल फ्रांसीसी कंपनी आर्सेलर मित्तल का अधिग्रहण कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने मित्तल के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति से भी बात की थी।





















