केदारनाथ. बम बम-भोले हर हर महादेव के जयकारो से गूंजी केदारघाटी,खुल गए केदारनाथ महादेव के कपाट,हुयी पूजा अर्चना
सनातन हिन्दू धर्म के
सबसे बड़े आस्था केंद्र
11वें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ महादेव
के कपाट
फिर से आज रविवार को सुबह 6 बजे से
भक्तों के दर्शन के लिए
खोल दिए गए हैं
।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक पहले जहां
केदारनाथ धाम में
लगभग पंद्रह हजार से ज्यादा लोग रुकते थे,
वहीं अब सिर्फ ड़ेढ़ सौ लोगों के ही रुकने के
इंतजाम हो पाया है।
केदारनाथ यात्रा यूं ही नहीं जान
जोखिम में डालकर केदारनाथ जाते हैं भक्त

केदारनाथ का पवित्र धाम एक साल पहले
तबाही में पूरी तरह बर्बाद हो चुका था,
लेकिन अब ये एक बार फिर भक्तों को अपने यहां बुला रहा है.
मंदिर तक पहुंचने के लिए नया रास्ता बनाया गया है.
पिछले साल आई प्रकृतिक आपदा के बाद
ये कपाट आम जनता के लिए पहली बार खोले गए हैं।

कुदरत की तबाही के एक साल बाद
भगवान केदारनाथ का मंदिर
एक बार फिर चमक दमक रहा है.
शिखर पर ध्वज उसी तरह लहरा रहा हे,
शिव के प्रिय वाहन नंदी पर फूलों का हार चढ़ा है.
श्रद्धालू भक्तों को जिस पल का इंतजार था
अब वो खत्म हो गया है.
क्योंकि आज से केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं और
अब फिर से भक्त अपने अराध्य के दर्शनों के लिए आएंगे.
पिछले साल 15 और 16 जून की रात केदारधाम में
जो प्रकृति का प्रकोप आया था
, तबाही मची थी,
उसके निशान अब भी देखने को मिल रहे हैं.
बस्तियां अब भी उजड़ी हुई दिख रही हैं,
रास्ते अब भी बेहद खराब हैं.
लोगों का कहना है कि प्रशासन की तैयारियां
लगभग एक साल के बाद भी आधी अधूरी हैं।
लेकिन प्रशासन का कहना है कि तैयारियां पूरी हो चुकी हैं,
बस भक्तों का इंतजार है.
केदारनाथ मंदिर के इर्द-गिर्फ 4 से 5 फिट बर्फ अब भी जमी है,
जिसे काटकर रास्ता बनाया गया है.
त्रासदी के बाद केदारनाथ धाम पुनः
अपने मूल प्रकृति स्वरुप में हे अद्भुत द्रश्य हे

लेकिन जिनके मन में आस्था का सैलाब हो,
भोले की भक्ति हो वो हर दुर्गमता का चुनौती का
सामना कर केदारनाथ जाने को बेताब हैं .
सच हे की शिव ही प्रकृति हें ,
शुभ कल्याणकारी और शाश्वत सत्य हें ,
अनादी और अनंत हे ,
कालो का काल महाकाल हे ,
सनातन धर्म में जिनकी आराधना दर्शन प्राणों से अधिक प्रिय हे.























