देहरादून। अबूझ मूहूर्त अक्षय तृतीया महापर्व की देश भर में धूम मची हुयी हे, इस पावन अवसर पर माँ बगुलामुखी जयंती, भगवान परशुरामजी जयंती तथा शंकराचार्य जयंती हर्षौल्लास से मनायी गयी, युगो युगों से आज के दिन सनातन हिन्दुओ में बगेर मुहूर्त देखे शुभ संस्कार विवाह भूमि भवन स्वर्ण आदि महत्वपूर्ण क्रय शुभआरम्भ संस्कार किये जाते हे.
गढ़वाल हिमालय की उूंची पहाड़ियों पर स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट आज अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर छह माह के शीतकालीन अवकाश के बाद श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए गए और इसी के साथ इस वर्ष की चार धाम यात्रा की औपचारिक शुरूआत हो गई जिसमे जनसेलाब उमड़ पड़ा ।
पिछले साल आई भीषण प्राकृतिक आपदा की मार झेलने से चारधाम यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई थी और इस बार यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर उत्तराखंड सरकार और प्रशासन सब मुस्तैद हैं।
उत्तरकाशी जिले में भटवाड़ी क्षेत्र के उपजिलाधिकारी के के सिंह ने बताया कि दस हजार फीट से ज्यादा की उूंचाई पर स्थित मां गंगा को समर्पित गंगोत्री धाम के कपाट विधिवत पूजा के बाद 12 बजकर एक मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्य पुजारी द्वारा मंदिर के कपाट खोले जाने के दौरान परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी।
उत्तरकाशी जिले में ही स्थित एक अन्य धाम यमुनोत्री के कपाट भी विधिवत पूजा अर्चना के बाद 12 बजकर 25 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि मां यमुना को समर्पित इस मंदिर के कपाट मुख्य पुजारी द्वारा पूजा किए जाने के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए।
गढ़वाल हिमालय के चार धामों में से दो अन्य, केदारनाथ मंदिर के कपाट चार मई को खोले जाएंगे जबकि बद्रीनाथ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए पांच मई को खुलेंगे।
शीतकाल के दौरान भारी बर्फवारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने वाले चारों धामों को हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिया जाता है और अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है। छह माह के यात्रा सीजन के दौरान देश विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इन चारों धामों के दर्शन के लिए आते हैं और इस यात्रा को गढ़वाल हिमालय की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
प्राकृतिक आपदा की विभीषिका झेलने के बाद पहली बार हो रही चार धाम यात्रा को लेकर प्रशासन और सरकार ने सड़क, पेयजल, बिजली, खाद्य और चिकित्सा सुविधाओं कें अलावा सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आई प्राकृतिक आपदा से सबक लेते हुए गठित की गई राज्य आपदा रिस्पांस फोर्स ( एसडीआरएफ) की टुकड़ियां भी संवेदनशील जगहों
पर तैनात की गई हैं। इस बार तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए उनके बायोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन और उनके मोबाइल फोन नम्बरों पर मौसम संंबंधी एसएमएस एलर्ट भेजने का भी प्रावधान किया गया है।
मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि मां यमुना को समर्पित इस मंदिर के कपाट मुख्य पुजारी द्वारा पूजा किये जाने के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिये खोल दिये गये। गढ़वाल हिमालय के चार धामों में से दो अन्य, केदारनाथ मंदिर के कपाट चार मई को खोले जायेंगे जबकि बद्रीनाथ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिये पांच मई को खुलेंगे। श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि कपाट खुलने के बाद छह माह तक गंगा की पूजा गंगोत्री धाम में होगी।
कपाट खुलने का मुहूर्त
धाम शुभ मुहूर्त (दोपहर)
गंगोत्री 12:01
यमुनोत्री 12:30
गंगोत्री और यमुनोत्री के बारे में
गंगोत्री की ऊंचाई 3042 मीटर
ऋषिकेश से दूरी 260 किलोमीटर
यमुनोत्री की ऊंचाई 3185 मीटर
ऋषिकेश से दूरी 235 किलोमीटर
कैसे पहुंचें गंगोत्री-यमुनोत्री
गंगोत्री धाम तक सड़क से सीधे वाहन द्वारा पहुंचा जा सकता है। ऋषिकेश से उत्तरकाशी होते हुए गंगोत्री पहुंचा जाता है। यमनोत्री धाम पहुंचने के लिए जानकी चट्टी से करीब पांच किलोमीटर पैदल रास्ता है। जानकी चट्टी तक ऋषिकेश, मसूरी या विकासनगर से बड़कोट होते हुए पहुंचा जा सकता है।
मुसीबत में यहां करें संपर्क
आपदा कंट्रोल रूम-01374-222722, 223526, 07500337269
पुलिस कार्यालय 01374 222116, 222219
डीएम कार्यालय 01374 222201, 222280
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव-941184338
यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव-8171510524
बड़कोट थाना-01375 224241
एसडीएम बड़कोट-9411198958























