
नई दिल्ली। निवेशकों को 20 हजार करोड़ रूपये नहीं लोटने के कारण सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय को अभी कम से कम एक और सप्ताह तिहाड़ जेल में ही बंद रहेंगे.
हमेशा बड़ी बड़ी इवेंट कर ग्लेमर और राजनीती के दिग्गजों से घिरे रहने वाले और खुद कई हजार करोड़ की कम्पनियों का मालिक, आसामी बताकर निवेशको से धन इकट्ठे करने वाले सहाराश्री सुब्रत राय के वकीलो को उनकी और दो निदेशकों की जमानत के लिये दस हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था करने में भी मुश्किल आ रही है।
शीर्ष अदालत ने कल ही यह शर्त लगाई थी कि राय को जमानत दे दी जाएगी यदि वह दस हजार करोड़ रुपए जमा कराएं। इसमें से पांच हजार करोड़ रुपए बैंक गारंटी के रूप में जमा कराने होंगे। उनके वकीलों ने कहा कि इतनी रकम की बैंक गारंटी मुहैया कराने के लिये कम से कम तीन महीने लगेंगे।
65 वर्षीय सुब्रत राय 4 मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्होंने आज उच्चतम न्यायालय में कहा कि निवेशकों के 20 हजार करोड़ रूपये का सेबी को भुगतान नहीं करने के कारण उन्हें हिरासत में रखने का आदेश गैरकानूनी और असंवैधानिक है और इस आदेश को निरस्त किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति के के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की पीठ के समक्ष राय और सहारा समूह की ओर से राम जेठमलानी के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि इसका (पीठ का) दृष्टिकोण दुराग्रहपूर्ण है और इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर उसे खुद सुनवाई नहीं करनी चाहिए। इसी पीठ ने राय को हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।
जेठमलानी ने कहा, ‘‘देश में किसी अदालत ने कानून की इतनी बड़ी गलती की है। मैं सर्वाधिक सम्मान के साथ कहना चाहता हूं कि कानून की दृष्टि से इसमें गलती है। ’’’
सहारा प्रमुख सुब्रत रायके खिलाफ अवमानना याचिका न्यायालय में लंबित होने के बावजूद उन्हें जेल भेजे जाने के तथ्य को इंगित करते हुये जेठमलानी ने सवाल किया, ‘‘क्या किसी व्यक्ति को इसकी जानकारी के बगैर ही जेल भेजा गया है कि उसने क्या अपराध किया है और किसी प्रावधान के तहत उसे दंडित किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा कि धन का भुगतान नहीं करने के कारण एक व्यक्ति को जेल भेजना असंवैधानिक है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरिम जमानत के लिये दस हजार करोड़ रूपए के भुगतान की शर्त लगाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने सभी अधिवक्ता साथियों की ओर से हमारी अपील पर विचार करने का आग्रह करता हूं। मैंने इतने बरसों में कभी यह नहीं देखा कि अदालत ने जमानत के लिए 10,000 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया हो।
उल्लेखनीय हे कि नियामक प्राधिकारी सेबी ने सहारा को निवेशको के 20000 करोड़ गलत जानकारी देकर इकट्ठे किये और जांच में दोषी पाए जाने पर बापस लोटने की बजाये कानूनी अडचने पैदा करने का दोषी बताया, जिस पर लम्बे समय से जारी सर्वोच्च न्यायालय के आदेशो का भी सहारा ने जब पालन नहीं किया तब अवमानना प्रकरण में सहारा प्रमुख सुब्रत राय को सर्वोच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल में बंद कर रखा हे , माननीय न्यायालय ने सुब्रत राय को 10000 करोड़ की जमानत का विकल्प दिया हे ताकि वे फिर से मुकर न जाए.























