नईदिल्ली.उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रही बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने आज यहां कहा कि अगर लोकसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी ’वैलेंस आफ पावर’ की भूमिका में होगी तो बीएसपी धर्मनिरपेक्ष दलों का समर्थन लेकर सरकार बनायेगी मगर किसी भी कीमत पर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के साथ नहीं जायेगी.
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों की घोषणा करते हुए मायावती ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ’’ वे उत्तर प्रदेश में तीन बार बीजेपी के साथ गठबंधन सरकार बना चुकी है और अब तक उसकी रीति नीति और सोच में कोई बदलाव नहीं आया है इसलिए मगर बीएसपी ’ वैलेंस आफ पावर ’ की भूमिका में आयी तो बीजेपी और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार कतई नहीं बनायेगी.’’
उन्होंने कहा कि पूरा प्रयास होगा कि इस लोकसभा चुनाव में बीएसपी अधिक से अधिक सीटें जीत कर ’ वैलेंस आफ पावर ’ के रुप में उभरे.
उन्होंने कहा कि अगर बीएसपी मजबूत स्थिति में उभर कर आयी और केन्द्र सरकार में सरकार बनाने का कोई अवसर मिला तो वे उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ही केन्द्र में भी ’सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर ही सरकार बनायेगे.
नरेन्द्र मोदी के बनारस और मुलायम सिंह यादव के आजमगढ से चुनाव लड़ने के बारे में मायावती ने कहा कि उनका मानना है कि पूर्वाचल से इन दोनो नेताओं के लड़ने का फैसला दोनो दलों की सोची समझी साजिश और षडयंत्र का हिस्सा है ताकि चुनाव में हिन्दू मुस्लिम रंग दिया जा सके.
उन्होंने हिन्दू और मुस्लिम दोनो समुदायों के लोगो से पुरजोर अपील की कि वे सपा और बीजेपी के षडयंत्र को कामयाब न होने दें. साथ ही साथ चुनाव आयेाग से भी अपील की कि वह इन दोनों पार्टियां पर पैनी नजर रखे अन्यथा प्रदेश का माहौल खराब हो सकता है.
यह पूछे जाने पर कि क्या ममता बनर्जी और जयललिता से सीटो के तालमेल और गठबंधन को लेकर कोई बातचीत हुई, मायावती ने कहा कि जब हमने जिन राज्यों में भी हमारा संगठन मजबूत है अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है तो बातचीत का सवाल ही कहां पैदा होता.
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव अपने बलबूते पर लड़ेगी.
पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं. टिकटों के बंटवारे में इस बार भी सर्वसमाज के उचित प्रतिनिधित्व देते हुए 80 में से 17 सुरक्षित सीटों पर अनुसूचित जातियों को, शेष 63 में 15 सीटों पर पिछड़ों, 19 सीटों पर मुस्ल्मिों को, 21 सीटों पर ब्राहमणों को, आठ सीटों पर क्षत्रियों को और 29 सीटों पर अन्य अगड़ी जातियों के लोगों को मैदान में उतारा गया है. साथ ही साथ महिलाओं को भी सात टिकट दिये गये हैं.
उन्होंने कहा कि इस बार लोकसभा के चुनाव गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार तथा आतंकवाद पर अंकुश लगाने के मुद्दों के बजाय धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिक ताकतों के बीच होता दिख रहा है.
बीएसपी साम्प्रदायिक सोच रखने वाली बीजेपी और सहयोगी दलों को सत्ता में आने से रोकने के लिये पूरी ताकत लगा देगी.
मायावती ने यह भी कहा कि हर स्तर पर असफल रहे कांग्रेस नीत संप्रग को भी केन्द्र में वापस नहीं आने दिये जाएगा, जिसके शासनकाल में गरीबी, भ्रष्टाचार, महंगाई बड़े पैमाने पर बढ़ा है और हर वर्ग दुखी नजर आया.
उन्होंने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी :सपा: को भी लपेटे में लिया और कहा कि सूबे में इस पार्टी का अब तक का शासनकाल, खासकर कानून-व्यवस्था और विकास के मामले में बहुत खराब रहा है. बीएसपी का पूरा प्रयास रहेगा कि इस बार चुनाव में केन्द्र में सही पार्टी के नेतृत्व में ही ‘सर्वजन हिताय व सुखाय’ की नीति वाली सरकार बने.
मायावती ने कहा कि वह पूरे देश में बीएसपी के प्रचार का अभियान 22 मार्च से शुरू करेंगी जो नौ मई तक जारी रहेगा. उत्तर प्रदेश में इसकी शुरुआत तीन अप्रैल से बिजनौर में जनसभा के जरिये की जाएगी. उन्होंने कहा कि वह प्रचार अभियान का लगभग 90 प्रतिशत समय उत्तर प्रदेश में ही देंगी.
बीएसपी प्रमुख ने खुद के आजमगढ़ की लालगंज सीट से, वाराणसी से बीएसपी महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र और आजमगढ़ से नसीमुद्दीन सिद्दीकी के चुनाव लड़ने की मीडिया में आयी खबरों का जोरदार खण्डन किया और कहा कि आजमगढ़ से शाह आलम, लालगंज से बीएसपी के सांसद डाक्टर मनिराम तथा वाराणसी से विजय प्रकाश जायसवाल के टिकट पहले ही तय किये जा चुके हैं और इन सीटों पर कोई बदलाव नहीं किया जायेगा.
अब बात सियासत की
1.मायावती ने एक बार फिर मुसलमानों पर फोकस किया. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह यादव ने आपस में मिली भगत कर ली है. इसीलिए दोनों पूर्वांचल की सीटों से चुनाव लड़ने आ रहे हैं. मायावती के मुताबिक सपा-बीजेपी चाहते हैं कि वोटों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो जाए.
2. बीजेपी पर ज्यादा हमलावर रहीं मायावती. उन्होंने यूपीए से भी पहले एनडीए का जिक्र किया. वह बोलीं कि बीएसपी एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के लिए पूरा जोर लगा देगी. मायावती बोलीं कि मुद्दे तमाम हैं, मगर अभी ऐसा लग रहा है कि लड़ाई सांप्रदायिकता और धर्म निरपेक्षता के बीच है. मायावती ने यह साफ किया कि बीजेपी के साथ चुनाव बाद भी गठबंधन नहीं होगा. उन्होंने कहा कि बीजेपी को हम आजमा चुके हैं. लगता नहीं कि उनकी सोच में कोई तब्दीली आई है.
3. बैलेंस ऑफ पावर. मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका बार बार जिक्र किया. उनका कहना था कि यदि हम इस हैसियत में आए कि सरकार बना पाएं, तो जरूर बनाएंगे. इसके लिए तमाम धर्म निरपेक्ष दलों का सहयोग लिया जाएगा. ये दल कौन होंगे. क्या इसमें कांग्रेस भी हो सकती है, जैसे कई सवालों पर मायावती का एक ही जवाब था. चुनाव परिणाम आने के बाद सूरत तय होगी. पर इतना तय है कि मायावती अपने वोटर्स को साफ संदेश देना चाहती हैं. संदेश कि लॉटरी लग सकती है.
4. यूपीए का विरोध करते हुए मायावती ने बस इतना ही कहा कि उनके राज में गरीबी और महंगाई बढ़ी है. कांग्रेस का जिक्र विरोध बड़ा रस्मी सा रहा.
5. हम मेनिफेस्टो जारी नहीं करते. मायावती का यह एक वाक्य उनकी और उनकी पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली पर काफी कुछ कहता है. बहरहाल, मायावती ने कहा कि हमने एक लिखित अपील जारी की है. इस अपील में भी सांप्रदायिकता के खिलाफ और सामाजिक सौहार्द्र के पक्ष में सिर्फ मायावती को बताया गया है.
6. मायावती ममता बनर्जी और जयललिता के संपर्क में नहीं हैं. कम से कम सार्वजनिक रूप से तो उनका यही स्टैंड है. मायावती ने कहा कि ये सब चुनाव बाद की बातें हैं.
7. चुनावी अफवाहों को लेकर मायावती ने सख्त रुख दिखाया. मीडिया को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि मैं अपने वोटरों और सपोर्टरों को उन मीडिया बंधुओं से सावधान करना चाहती हूं तो साजिश के तहत बीएसपी के बारे में गलत बातें प्रचारित करते हैं.
8. मायावती ने साफ किया कि सूत्रों के हवाले से उनके लालगंज सुरक्षित से चुनाव लड़ने की जो खबर चल रही है, वह गलत है. उन्होंने कहा कि वाराणसी से सतीश चंद्र मिश्र और आजमगढ़ से नसीमुद्दीन सिद्दीकी के चुनाव लड़ने की खबर भी अफवाह है. मायावती ने कहा कि इन सीटों पर कैंडिडट पहले ही तय हो चुके हैं और वही रहेंगे.
9. यानी आजमगढ़ में मुलायम को बीएसपी की तरफ से टक्कर देंगे सिटिंग एमएलए शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली. उधर वाराणसी में मोदी के सामने होंगे विजय प्रकाश जायसवाल.
10. आखिर में मायावती ने चुनाव आयोग से अपील की. उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा पर निगाह रखने की जरूरत है क्योंकि ये आखिर में दंगों के जरिए ध्रुवीकरण की कोशिश करेंगे.





















