नई दिल्ली। धर्मनगरी वाराणसी से नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी ने इस सीट को न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में चर्चा में ला दिया है। मोदी समर्थकों का उत्साह उफान पर है तो वहीं विरोधी भी कमर कस कर तैयार हैं। चर्चा के मुताबिक आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी यहां से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। और ऐसे में ये शहर दिलचस्प मुकाबले के लिए तैयार है। वाराणसी में करीब पंद्रह लाख मतदाता हैं और इनमें ढाई लाख वोटर मुसलमान हैं।
बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की वाराणसी से उम्मीदवारी ने शहर का माहौल बदल दिया है। आम लोगों की बात करें तो वो इस बात से ही खुश है कि वाराणसी चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार उनके शहर से चुनाव लड़ रहा है। मोदी समर्थकों का तो यहां तक दावा है कि ये चुनाव जाति और धर्म से ऊपर उठकर होगा।
भजन गायक अरविंद योगी ने कहा कि मोदी की वजह से हमलोग तो चार्ज हो ही गए अब पूरा देश चार्ज होगा। वहीं बृजेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि हम बहुत खुश हैं, हमारी उम्मीद थी की मोदी यही से चुनाव लड़े, उनके यहां लड़ने से बहुत प्रभाव पड़ेगा। अभी तक बीजेपी की स्तिथि तो अच्छी नहीं थी पर अब इसका असर पड़ेगा और पूर्वांचल के लोगों को लाभ होगा।
मोदी सबको भा रहे हों, ऐसा भी नहीं। वाराणसी में रहने वाला एक बड़ा तबका जो मोदी के खिलाफ है। अब अरविंद केजरीवाल और तमाम विरोधी दलों में उम्मीद तलाश रहा है। उसे लगता है कि मोदी के खिलाफ विपक्ष अगर एकजुट हो गया तो उनकी राह आसान नहीं होगी। वाराणसी में मुसलमान वोटरों की तादाद करीब ढाई लाख है। विरोधी दलों की नजर अब इसी वोटबैंक पर है।
वरिष्ट पत्रकार अमिताभ भटाचार्य का कहना है कि बनारस इस समय वेंटिलेटर पर है। कुल मुलाकर इस शहर को हताशा ही हाथ लगी है इसलिए नरेंद्र मोदी से ज्यादा आशा होगी। पर ज्यादा आशा भी खतरनाक है। ये तो समय ही बतायगा अगर पॉपुलेशन को देखते हुए नरेंद्र मोदी एक नवीन वाराणसी बनाए तो कुछ होगा।
आजादी के छह दशक बाद भी घटिया गंदी गलियां और टूटी सड़कें वाराणसी की पहचान हैं। दुनियाभर से आने वाले विदेशी जिस शहर की आस्था, संस्कृति और गंगा के दीवाने हैं उसी शहर में आम आदमी बिजली पानी जैसी जरूरतों के लिए मोहताज है। वक्त बताएगा कि मोदी के आने से बनारस कितना बदलेगा। फिलहाल तो वाराणसी में मोदी के इस्तकबाल की तैयारियां पूरी हैं।
यकीन मानिए, वाराणसी में ये चुनाव ना तो विकास के मुद्दे पर होगा ना ही इस बार मुद्दा बनेगी बिजली की कटौती, गंगा की सफाई भी कोई मुद्दा नहीं होगी। इस चुनाव में तो सिर्फ एक ही मुद्दा होगा और वो होगा नरेंद्र मोदी।





















