नईदिल्ली. सरकार के बड़े मंत्रियो द्वारा अपनी कृपापात्र चीनी मिलो को तो करदाताओ के खूनपसीने की कमाई से बसूली गई गाडी रकम से 7200 करोड़ देने की व्यवस्था जमा ली , लेकिन बेचारा मेहनतकश कंगाल किसान रो धो कर आन्दोलन करे या आत्महत्या ये क्रोनि कैपिटल पूँजीपतियो की सरकारे और इनके गुलाम नुमायिंदे वोट तो किसान से हडपते हे और किसानो को नहीं दे पाते उनका बाजिब हक़, गन्ने का मामूली उचित मूल्य 1000 रु प्रति क्विंटल. चीनी मिलों को फाइनैशल मुसीबत से उबारने के नाम पर 7,200 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज देने जा रही है। दिखाने के लिए शर्त यह होगी कि चीनी मिलों का इन पैसों का इस्तेमाल किसानों का उनकी बकाया रकम देने में करना होगा जबकि सब जानते हे की इस पेसे को किसे दिया जायेगा. इसके अलावा कई दूसरी राहतें भी चीनी मिलों को दी जाएंगी। देश के कृषि मंत्री तथा कई शक्कर कारखानों लाबिओ के शीर्ष शरद पवार की अगुवाई वाली मंत्रियों की अनौपचारिक समूह की शुक्रवार को हुई बैठक में चीनी मिलों को राहत देने के लिए सिफारिशों को मंजूरी दी। अब इन सिफारिशों को कैबिनेट को भेजा जाएगा और वहां से पारित होने के बाद इन्हें लागू कर दिया जाएगा।
क्या है राहत पैकेजचीनी मिलों के कर्ज को आरबीआई के नॉर्म्स के मुताबिक दिया जाएगा। बैंक चीनी उद्योग को 12 फीसदी ब्याज दर पर 7,200 करोड़ रुपये का प्रदान करेंगे। 2 साल तक चीनी मिलें ब्याज नहीं देंगी। इसमें शर्त यह होगी कि इस धन का इस्तेमाल किसानों के बकाए के भुगतान के लिए किया जाएगा। कुल ब्याज सहायता 12 फीसदी होगी। इसमें से 7 फीसदी का भुगतान चीनी विकास फंड से किया जाएगा जबकि 5 फीसदी भारत सरकार की ओर से होगा। इसके बाद चीनी मिलों को पांच सालों में कर्ज अदा करना होगा। इसके अलावा चीनी मिलों को 40 लाख टन तक कच्ची चीनी के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन देने, बफर स्टॉक बनाने और पेट्रोल में इथनॉल के सम्मिश्रण की मात्रा को दोगुना कर 10 फीसदी करने की सिफारिश भी की है। बैठक में यूपी, महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुख्यमंत्री मौजूद थे।























