मंथन.बिना एफ़आयीआर के ही तेजपाल के विरुद कार्रवाही करने वाली गोवा पुलिस , एफ़आयीआर होने के बाद भी आसाराम के खिलाफ लम्बे समय तक आँखे मूंदी रही और नारायण साईं को पकड़ नहीं सकी कई राज्यों की पुलिस और अब जब बड़े जज गांगुली को सुप्रीम कोर्ट की कमेंटी ने प्रथम दृष्टिया मामला पाए जाने पर भी दिल्ली या कोल्कता पुलिस कार्रवाही प्रारंभ ही नहीं कर पा रही हे और भारी आलोचना के बाद भी अपने न्याय निर्णयों से अलग ही छाप छोड़ने वाले गांगुली ना मालूम क्यों एक मामूली सा पद नहीं छोड़ पा रहे हे, कुछ समझ में नहीं आता, दूसरी और फारुख कह रहे हे अब तो किसी महिला को नोकरी पर रखना मुश्किल हो जायेगा , बड़े बड़े कानूनविद भी माथा देखकर तिलक काढने जेसे काम कर रहे हे , अब जब खुद के तबके की बात आयी तो योन उत्पीडन कानून का भी अनुसूचित जाति कानून या दहेज़ कानून जेसा दुरूपयोग होने की आशंका व्यक्त हो रही हे । क्या देश में दो कानून हे या कहें तो तीन कानून हे एक अपने पक्ष के लिए दूसरा विरोधी और तीसरा शोषित पीड़ित गरीब निबल विकल के लिए ? लगता तो यही था ,जो भी हो लेकिन अब तो लगता हे बात निकली हे तो किसी तार्किक परिणिति तक जरूर पहुचेगी।






















