पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नेतागण एक-दूसरे पर नीचे जाकर प्रहार कर रहे हैं। भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी की ओर से सोनिया गांधी को ‘बीमार’ कहे जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को फिर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। लेकिन, नेताओं के बीच जुबानी जंग सिर्फ उन राज्यों में ही नहीं चल रही है, जहां पर चुनाव होने जा रहे हैं। उन राज्यों में भी नेता बयान देने में नीचे जा रहे हैं, जहां पर अभी चुनाव नहीं हो रहे हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पत्रकारों से बातचीत में भाजपा को ‘रावण’ तो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को ‘कंस’ कहकर संबोधित किया। इससे पहले जेडीयू के एक नेता ने मोदी को ‘आतंकवादी’ कहा था। बिहार की तरह यूपी के नेता भी बयानबाजी में किसी से पीछे नहीं रहना चाहते हैं। उत्तरप्रदेश बसपा ने नरेंद्र मोदी को ‘तेली’ और महान दलित नेता बाबू जगजीवन राम को ‘चां**’ तक कह डाला। राहुल ने बीजेपी को चोर व लूटने वाली पार्टी कहा. सभी दलो के विज्ञापनों का स्तर भी लगातार नीचे और व्यक्तिगत होता जा रहा हे सभी खुद को शरीफ और दुसरो को लुटेरा बता रहे हे, जनता को सब जानकारी में इजाफा कर रहे हे.येनकेन वोट हथियाना ही मात्र असली एजेंडा होता जा रहा हे, बहुसंख्यक जनता भी भाषा धर्म पंथ, संप्रदाय जाति रिश्तो और वोट बैंक के कथित ठेकेदारो(की-वोटर्स) की इच्छा, की और ही, बिना चाहे भी झुकती जाती हे, क्या इस देश की लोकतंत्र की नियति यही हे?






















