बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश में प्रस्तावित भगवान राम के सबसे बड़े मंदिर के प्रारूप का अनावरण किया। नीतीश ने पूर्वी चंपारण जिला के केसरिया में बनने वाले उक्त विराट रामायण मंदिर के मॉडल का गुजरात स्थित द्वारका के शंकराचार्य जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की उपस्थिति में बुधवार को यहां महावीर मंदिर परिसर में अनावरण किया।
इसे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण किए जाने का जबाब माना जा रहा हे ,नीतीश ताक में रहते हैं कि नरेंद्र मोदी की हर चाल का करारा जबाव दिया जाए। नीतीश की इस घोषणा को भी इसी रूप में देखा जा रहा है। नरेंद्र मोदी गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार पटेल की 557 फूट ऊंची मूर्ति बना रहे हैं। ऐसे में नीतीश ने भी नहले पर दहला चला और दुनिया का सबसे ऊंचा हिंदू मंदिर का मॉडल भी पेश कर दिया।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के जानकी नगर में प्रस्तावित इस 405 फीट ऊंचे मंदिर का निर्माण पटना के हनुमान मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। ट्रस्ट का दावा है कि तैयार हो जाने के बाद यह दुनिया का सबसे ऊंचा हिंदू मंदिर होगा। पटना स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर का संचालन इसी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। 2015 तक इस मंदिर के बनकर तैयार होने की संभावना है। जानकी नगर बिहार की राजधानी पटना से लगभग 120 किलोमीटर और ऐतिहासिक वैशाली शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर है।
इस साल 21 जून को जानकी नगर में भूमि पूजन किया गया था। हनुमान मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक जमीन अधिग्रहण कार्य पूरा हो चुका है और उसमें मिट्टी भरने का काम चल रहा है। ट्रस्ट 14 दिसंबर को खरमास शुरू होने के पहले 12 करोड़ की शुरुआती रकम से निर्माण कार्य शुरू करेगा और मंदिर के चबूतरे के निर्माण के बाद भक्तों से अपील करेगा कि वे निर्माण कार्य के लिए दान करें। ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए न तो किसी धार्मिक संगठन, सरकार और न ही किसी कॉरर्पोरेट घराने से कोई मदद मांगी गई है।
495 फुट ऊंचा, 2800 फुट लंबा विराट रामायण मंदिर रिटायर आईपीएस ऑफिसर किशोर कुणाल की दिमाग की उपज है। इसे पहले कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की प्रतिमूर्ति बनाने की योजना थी और नाम रखा गया था, ‘विराट अंकोरवाट राम मंदिर।’अंकोरवाट मंदिर वर्तमान में सबसे ऊंचा हिंदू मंदिर माना जाता है और यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है। लेकिन, आचार्य किशोर कुणाल के मुताबिक भारत स्थित कंबोडियाई दूतावास द्वारा इस सबंध में विरोध दर्ज कराया गया था। इसके बाद न सिर्फ प्रस्तावित मंदिर का मॉडल और नाम बदला गया बल्कि अंकोरवाट मंदिर से भी ऊंचा और बड़ा मंदिर निर्माण कर दुनिया के सबसे ऊंचे हिंदू मंदिर बनाने की योजना बनाई गई। हाजीपुर में पर्याप्त जमीन नहीं मिल पाने के कारण निर्माण स्थल के रूप में जानकी नगर का चयन किया गया।






















